माजरा दूबलधन स्थित तपोभूमि जटेला धाम में स्वामी नितानंद वाणी प्रचार प्रसार समिति एवं जनता कॉलेज चरखी दादरी के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी हरियाणा उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा अनुमोदित “स्वामी नितानंद की वाणी : मूल्य चिंतन और सार्थकता” विषय पर आयोजित की गई।
संगोष्ठी का शुभारंभ स्वामी नितानंद महाराज की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पीठाधीश्वर महंत राजेंद्र दास जी ने की, जिन्होंने सभी उपस्थित वक्ताओं, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और प्राध्यापकों का स्वागत किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में समाज को विकृतियों से दूर कर संस्कृति की ओर उन्मुख होने का संदेश दिया।
ज्ञान परंपरा पर विद्वानों के विचार
संगोष्ठी के प्रथम सत्र में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली के प्रो. रामनाथ झा ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्राप्त करने से जीवन में दुख का स्पर्श भी नहीं होता। उन्होंने मनीषा पंचकम और मातृ मंचकम जैसे ग्रंथों के अध्ययन की प्रेरणा दी तथा अद्वैत दर्शन पर गहन विचार-विमर्श किया।
द्वितीय सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. पूरन चंद टंडन ने संत नितानंद कृत “सत्य सिद्धांत प्रकाश” पर अपने विचार रखे। उन्होंने सामाजिकता, सहजता में गहनता, विद्या-माया, अविद्या-माया और प्रकृति प्रदत्त भोजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संतों की वाणी में जीवन जीने की कला छिपी है और इसके प्रचार-प्रसार के लिए अनेक सुझाव दिए।
शोध पत्र प्रस्तुतिकरण और समापन
संगोष्ठी में डॉ. हेमलता शर्मा, डॉ. किरण, डॉ. दयानंद कादयान, डॉ. सुमन कुंडू, डॉ. महेश कुमार सहित 50 से अधिक प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. मनमोहन शर्मा ने सभी अतिथियों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं साध-संगत को संगोष्ठी की सफलता में योगदान के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में जब्बर सिंह, मास्टर चाँद, मास्टर राजबीर, होशियार सिंह, डॉ. अजय कादयान, डॉ. लक्ष्मी नारायण, डॉ. महेंद्र सिंह आदि का विशेष सहयोग रहा।