आचार्य चन्द्र भूषण जी : सनातन सभ्यता एवं धर्म ग्रंथों के अनुसार, 29 मार्च 2025, शनिवार को चैत्र अमावस्या के दिन एक खंड सूर्य ग्रहण घटित होगा। भारतीय स्टैंडर्ड टाइम (IST) के अनुसार ग्रहण का समय निम्नानुसार रहेगा:
- ग्रहण प्रारंभ: दोपहर 14:21 बजे
- ग्रहण मध्य: दोपहर 16:17 बजे
- ग्रहण समाप्त: सायं 18:14 बजे
यह सूर्य ग्रहण भारत के किसी भी शहर में दृश्य नहीं होगा, इसलिए भारत में इसका कोई प्रभाव नहीं रहेगा और यहां सूतक काल का भी कोई विचार नहीं किया जाएगा।
ग्रहण के दृश्यता क्षेत्र
यह खंड सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से निम्नलिखित स्थानों पर दिखाई देगा:
- यूरोप के अधिकतर देश
- उत्तर-पश्चिम अफ्रीका के देश
- उत्तर अमेरिका के पूर्वी क्षेत्र
- उत्तरी रूस
- दक्षिणी अमेरिका का उत्तरी भाग
- अटलांटिक एवं आर्कटिक महासागर
मुख्य देश जहां ग्रहण दिखाई देगा:
ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, बेल्जियम, बरमूडा, उत्तर ब्राजील, कनाडा (पूर्वी भाग), डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीनलैंड, हंगरी, आयरलैंड, इटली, लिथुआनिया, मोरक्को, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्वीडन, यूक्रेन, इंग्लैंड तथा अमेरिका के पूर्वी क्षेत्रों में इस ग्रहण की खंड ग्रास आकृति देखी जाएगी।
शनिश्चरा अमावस्या का विशेष महत्व
29 मार्च 2025, शनिवार को शनिश्चरा अमावस्या के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को प्रातःकाल उठकर गंगाजल युक्त जल से स्नान करना चाहिए। जो श्रद्धालु हरिद्वार या प्रयाग जाकर गंगा स्नान कर सकते हैं, उन्हें वहां जाकर पुण्य लाभ प्राप्त करना चाहिए। जो भक्तगण वहां नहीं जा सकते, वे अपने घर में ही गंगाजल डालकर स्नान करें और भगवान की पूजा-अर्चना करें।
धार्मिक अनुष्ठान एवं पुण्य कर्म:
- गौ माता की सेवा करें एवं उन्हें हरा चारा खिलाएं।
- संत एवं ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दें।
- जप, तप, हवन, पूजा-पाठ आदि करें।
इस प्रकार, यह दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी रहेगा और शुभ कार्यों में संलग्न रहने से भक्तों को विशेष लाभ प्राप्त होगा।