नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट किया है कि देश का बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह से मजबूत और सुरक्षित है, और इस पर किसी प्रकार का व्यापक या ‘सिस्टमैटिक’ जोखिम नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) की चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ रुपए की बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है।
RBI की पैनी नजर, पर व्यक्तिगत टिप्पणी से इनकार केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ RBI बोर्ड की बैठक के बाद आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्थिति साफ की।
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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के घोटाले पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “केंद्रीय बैंक स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है, लेकिन हम किसी व्यक्तिगत बैंक या संस्था पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करते हैं।”
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उन्होंने निवेशकों और आम जनता को आश्वस्त किया कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली के पास पर्याप्त पूंजी और तरलता (Liquidity) है।
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वर्तमान में बैंकों का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CAR) लगभग 17 प्रतिशत है, जो एक बेहद मजबूत स्थिति मानी जाती है। गवर्नर ने यहां तक कहा कि यदि अगले पांच वर्षों तक बैंकों में नई पूंजी नहीं भी डाली जाती, तो भी वे अपनी आवश्यकताएं पूरी करने में सक्षम रहेंगे।
क्या है IDFC फर्स्ट बैंक का धोखाधड़ी मामला? पिछले सप्ताह स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बैंक ने स्वीकार किया था कि यह धोखाधड़ी उनकी चंडीगढ़ शाखा में हुई है।
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यह मामला हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ विशिष्ट खातों तक ही सीमित है।
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बैंक ने नियामकों (Regulators) को इसकी सूचना दे दी है और पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
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मामले की जांच पूरी होने तक चार संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
शेयर बाजार में भारी गिरावट इस खुलासे का असर सोमवार को शेयर बाजार पर साफ देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही IDFC फर्स्ट बैंक के शेयरों में भारी बिकवाली हुई:
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शेयर 20 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 66.80 रुपए पर आ गया और इसमें ‘लोअर सर्किट’ लग गया।
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हालांकि, दोपहर बाद (करीब 2:33 बजे) कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन फिर भी शेयर 16.12 प्रतिशत के नुकसान के साथ 70.05 रुपए पर कारोबार कर रहा था।














