‘शार्क टैंक इंडिया’ की जज नमिता थापर इन दिनों सोशल मीडिया पर तीखी आलोचनाओं का सामना कर रही हैं। विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने नमाज़ के स्वास्थ्य लाभों पर एक वीडियो साझा किया। इसके बाद नमिता ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने यह बात केवल ‘वेलनेस’ के नजरिए से कही थी और वह योग व सूर्य नमस्कार पर भी पहले बोल चुकी हैं। हालांकि, इस विवाद में अब स्वामी केश्वनंद महाराज की भी एंट्री हो गई है।
स्वामी केश्वनंद महाराज ने नमिता थापर को हिंदू धर्म के वैज्ञानिक महत्व की याद दिलाते हुए कहा कि मंदिर जाने से स्वास्थ्य और योग की सभी क्रियाएं अपने आप पूरी हो जाती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि मंदिर की घंटी बजाना एक व्यायाम है, मूर्ति पर ध्यान लगाना मेडिटेशन है, और दंडवत प्रणाम करना एक संपूर्ण शारीरिक व्यायाम है। उन्होंने सवाल उठाया कि हिंदू धर्म को मानने के बावजूद नमिता इन वैज्ञानिक तथ्यों से अनजान कैसे रहीं?
विशेषज्ञों और आध्यात्मिक गुरुओं का मानना है कि मंदिर जाना केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। नियमित रूप से मंदिर जाने से व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। मंदिर का शांत वातावरण, घंटों की ध्वनि, मंत्रोच्चारण और आरती का माहौल मन को स्थिर करने, तनाव कम करने और ध्यान केंद्रित करने में अत्यधिक सहायक माना जाता है। सोशल मीडिया पर अब यह चर्चा ‘धर्म बनाम विज्ञान’ के रूप में तेज़ी से फैल रही है।














