नई दिल्ली। वर्ष 2024-25 के दौरान भारत में 5.5 लाख से ज्यादा घरेलू ट्रेडमार्क आवेदन दर्ज किए गए, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। यह उपलब्धि देश की संस्थागत मजबूती, आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और नए विचारों के साथ रचनाकारों व उद्यमियों के हितों की रक्षा की दिशा में अहम मानी जा रही है। यह जानकारी मंगलवार को केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने साझा की।
पीयूष गोयल ने Narendra Modi के विज़न—‘Ideate in India, Innovate in India, Make in India और Make for the World’—का उल्लेख करते हुए कहा कि ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 पिछले 26 वर्षों से नवाचार करने वालों की सुरक्षा का मजबूत आधार रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के निरंतर प्रयासों से भारत का इननोवेशन इकोसिस्टम सशक्त हुआ है, जिससे वैश्विक बौद्धिक संपदा (Global IP) क्षेत्र में भारत की पहचान और मजबूत हुई है।
दवाइयों और स्वच्छता उत्पादों में सर्वाधिक आवेदन
मंत्री ने बताया कि दवाइयों, पशु चिकित्सा और स्वच्छता से जुड़े उत्पादों की श्रेणियों में सबसे अधिक ट्रेडमार्क आवेदन दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि नीतिगत सुधार, डिजिटलीकरण और नए पहल भारत की स्थिति को वैश्विक आईपी प्रणाली में लगातार बेहतर बना रहे हैं।
ब्रांड सुरक्षा और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा
ट्रेडमार्क अधिनियम कंपनियों और व्यापारियों की ब्रांड पहचान को चोरी या नकल से बचाता है और बाजार में न्यायपूर्ण प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है। बदलते वैश्विक व्यापार और आधुनिक जरूरतों के अनुरूप इस कानून में समय-समय पर संशोधन किए गए हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली कंपनियों को भी पर्याप्त सुरक्षा मिल सके।
पंजीकरण, नवीनीकरण और प्रवर्तन
एक बार ट्रेडमार्क 10 वर्षों के लिए पंजीकृत होता है और बाद में इसे हर 10 साल में नवीनीकृत किया जा सकता है। यदि कोई ट्रेडमार्क अत्यधिक सामान्य हो, भ्रामक जानकारी देता हो या पहले से मौजूद ट्रेडमार्क से अत्यधिक मिलता-जुलता हो, तो उसे मंजूरी नहीं मिलती। कानून के तहत ट्रेडमार्क को बेचा या लाइसेंस पर दिया जा सकता है। उल्लंघन की स्थिति में जुर्माना, क्षतिपूर्ति और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रेडमार्क आवेदनों में यह रिकॉर्ड वृद्धि भारत की उद्यमशीलता, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को नई गति देगी।









