नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया, लेकिन अनजाने में उनके बयान ने बिहार में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया की प्रासंगिकता को और मजबूती दे दी।
राहुल गांधी ने कहा कि कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में एक लाख से अधिक फर्जी वोटर पाए गए हैं, जिनमें डुप्लीकेट नाम, गलत पते और फर्जी फोटो शामिल हैं। हालांकि, यही मुद्दा — वोटर लिस्ट की सफाई — बिहार में चुनाव आयोग SIR के तहत कर रहा है, जिसका कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन लगातार विरोध कर रहा है।
SIR क्या है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट नाम हटाकर मतदाता सूची को अद्यतन करना है। चुनाव आयोग के अनुसार अब तक 98% से अधिक मतदाताओं का सत्यापन हो चुका है, जिसमें 20 लाख मृतक नाम, 28 लाख स्थानांतरित प्रविष्टियां और 7 लाख डुप्लीकेट हटाए जा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट भी इस प्रक्रिया को हरी झंडी दे चुका है।
विरोध और विरोधाभास
जहां राहुल गांधी बिहार में SIR को ‘मतदाता दमन’ की रणनीति बताते हैं, वहीं मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप लगाकर वे खुद इस प्रक्रिया की जरूरत को स्वीकार कर बैठे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह एक तरह का ‘सेल्फ गोल’ है, जिसमें विरोध का तीर अपने ही पाले में जा लगा।
आयोग का खंडन
राहुल गांधी ने दो व्यक्तियों—आदित्य श्रीवास्तव और विशाल सिंह—के नाम एक से अधिक स्थान पर होने का दावा किया था। उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने जांच के बाद इन दावों को गलत बताया और स्पष्ट किया कि दोनों के नाम केवल बेंगलुरु की वोटर लिस्ट में ही पाए गए, यूपी की सूचियों में नहीं।
लोकतांत्रिक जरूरत
मतदाता सूची की सटीकता चुनावी निष्पक्षता की रीढ़ है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर विपक्ष को सचमुच फर्जी वोटरों की चिंता है, तो उसे किसी भी ऐसी प्रक्रिया का समर्थन करना चाहिए जो वोटर लिस्ट को साफ और पारदर्शी बनाने का काम करे—चाहे उसका नाम SIR ही क्यों न हो।














