नई दिल्ली/पुणे। देश के अग्रणी सहकारिता संगठन “सहकार भारती” की स्थापना 11 जनवरी 1979 को महाराष्ट्र के पुणे में हुई थी। अपने 47 वर्षों के गौरवपूर्ण सफर में सहकार भारती आज देश के 650 से अधिक जिलों में सक्रिय होकर सहकारिता आंदोलन की वृद्धि, शुद्धि और समृद्धि के लिए सतत कार्य कर रही है। इस अवसर पर संगठन की ओर से सभी सहकारी संस्थाओं, कार्यकर्ताओं और सहकारिता से जुड़े मित्रों को 47वें स्थापना दिवस (11 जनवरी 2026) की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गई हैं।
“बिना संस्कार नहीं सहकार, बिना सहकार नहीं उद्धार”
इस मूल मंत्र के साथ सहकार भारती समाज में सहकारिता के महत्व को रेखांकित करती रही है। संगठन का मानना है कि सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का भी प्रभावी माध्यम है।
शिक्षित युवाओं के लिए सहकारिता में सुनहरा अवसर
एस.डी. तिवारी, उत्तर क्षेत्रीय संगठन प्रमुख, सहकार भारती ने अपने संदेश में कहा कि को-ऑपरेटिव सोसायटी और एफपीओ (Farmer Producer Organisations) आज युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता की दिशा में एक सशक्त मंच बन सकते हैं। 2021 में सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद इस क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। इसके बाद:
- 2022–23 में सहकारिता विधेयक पारित कर बड़े सुधार किए गए।
- देशभर में लाखों पैक्स (PACS) और दुग्ध डेयरी समितियों को मंजूरी दी गई।
- तीन मल्टी-स्टेट सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू हुई।
इन पहलों से सहकारिता क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा हुई हैं और युवाओं से आह्वान किया गया है कि वे केवल नौकरियों के पीछे न भागें, बल्कि सहकारिता आंदोलन से जुड़कर स्वरोजगार के अवसर सृजित करें।
शिक्षा में सहकारिता को शामिल करने की पहल
सहकार भारती ने सुझाव दिया है कि सहकारिता जागरूकता के लिए इसे स्कूली पाठ्यक्रम में एक विषय के रूप में शामिल किया जाए।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस मांग को स्वीकार करते हुए देश के पहले राष्ट्रीय सहकारी विश्वविद्यालय – त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय (TSU) का शिलान्यास 5 जुलाई 2025 को गुजरात के आनंद जिले में किया। यह कदम “सहकार से समृद्धि” के लक्ष्य की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है।
राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025
24 जुलाई 2025 को घोषित राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 अगले दो दशकों के लिए सहकारी क्षेत्र के समावेशी और व्यवस्थित विकास का रोडमैप प्रस्तुत करती है। इसका उद्देश्य हर गांव में सहकारी समिति की स्थापना और सहकारिता का डिजिटल रूपांतरण है।
नई सहकारी संस्थाओं की पहल
सरकार द्वारा सहकारिता क्षेत्र में कई नई संस्थाएं गठित की गई हैं, जिनमें शामिल हैं:
- भारत टैक्सी सहकारी सेवा (सहकार टैक्सी)
- राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL)
- राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL)
- भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL)
- राष्ट्रीय सहकारी लॉजिस्टिक्स लिमिटेड (NCLL)
- राष्ट्रीय सहकारी डिजिटल लिमिटेड (NCDL)
- राष्ट्रीय सहकारी स्वास्थ्य लिमिटेड
एफपीओ और युवाओं की भूमिका
कृषि मंत्रालय द्वारा देशभर में 10,000 एफपीओ के गठन की योजना चलाई जा रही है, वहीं मत्स्य विभाग द्वारा फिश फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FFPO) बनाए जा रहे हैं।
लेखक का सुझाव है कि इन पहलों में सहकार भारती को भागीदार बनाया जाए, ताकि स्थानीय युवाओं को बेहतर अवसर मिलें और सहकारिता आंदोलन को नई दिशा मिले। इससे न केवल स्वरोजगार बढ़ेगा, बल्कि स्थायी रोजगार सृजन भी होगा।














