नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक जहाज आईएनएसवी कौंडिन्य को साकार करने में किए गए अथक प्रयासों के लिए डिजाइनरों, कारीगरों, जहाज निर्माताओं और भारतीय नौसेना को बधाई दी है। यह जहाज गुजरात के पोरबंदर से ओमान के मस्कट के लिए अपनी पहली ऐतिहासिक समुद्री यात्रा पर रवाना हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आईएनएसवी कौंडिन्य का निर्माण प्राचीन भारतीय सिलाई-जहाज (Stitched Ship) तकनीक से किया गया है, जो भारत की समृद्ध और गौरवशाली समुद्री परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भारत और खाड़ी क्षेत्र के बीच सदियों पुराने समुद्री, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इतिहास से जुड़ा कौंडिन्य का नाम
इतिहास में कौंडिन्य नाम का उल्लेख एक महान भारतीय नाविक और व्यापारी के रूप में मिलता है, जिन्होंने प्राचीन काल में समुद्री मार्गों के माध्यम से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया तक भारत के व्यापारिक और सांस्कृतिक प्रभाव को फैलाया। माना जाता है कि कौंडिन्य ने समुद्र के रास्ते कंबोडिया (प्राचीन फुनान राज्य) तक यात्रा की और वहां भारतीय संस्कृति की नींव रखी। इसी ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देने के लिए इस जहाज का नाम आईएनएसवी कौंडिन्य रखा गया है।
प्राचीन तकनीक, आधुनिक संकल्प
यह जहाज बिना किसी आधुनिक धातु की कीलों के, लकड़ी के तख्तों को नारियल के रेशों और पारंपरिक रस्सियों से सिलकर तैयार किया गया है। यह तकनीक हजारों वर्ष पहले भारतीय नाविकों द्वारा अपनाई जाती थी और भारतीय जहाजों की मजबूती व समुद्री दक्षता का प्रमाण मानी जाती है। आईएनएसवी कौंडिन्य उसी परंपरा का आधुनिक पुनर्निर्माण है।
पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा,
“यह देखकर बेहद खुशी हुई कि आईएनएसवी कौंडिन्य पोरबंदर से ओमान के मस्कट के लिए अपनी पहली यात्रा पर रवाना हो रहा है। प्राचीन भारतीय सिलाई-जहाज तकनीक से निर्मित यह जहाज भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं को दर्शाता है। मैं इस अद्वितीय जहाज को साकार करने में किए गए अथक प्रयासों के लिए डिजाइनरों, कारीगरों, जहाज निर्माताओं और भारतीय नौसेना को बधाई देता हूं। मैं चालक दल को सुरक्षित और यादगार यात्रा के लिए शुभकामनाएं देता हूं, क्योंकि वे खाड़ी क्षेत्र और उससे परे हमारे ऐतिहासिक संबंधों को पुनर्जीवित कर रहे हैं।”
समुद्री विरासत की ओर एक कदम
विशेषज्ञों के अनुसार, आईएनएसवी कौंडिन्य केवल एक जहाज नहीं, बल्कि भारत की समुद्री सभ्यता, व्यापारिक इतिहास और सांस्कृतिक संपर्कों का प्रतीक है। इसकी यात्रा ‘विकसित भारत’ के साथ-साथ विरासत से विकास के दृष्टिकोण को भी मजबूती प्रदान करती है।
यह पहल आने वाली पीढ़ियों को भारत की प्राचीन समुद्री शक्ति और वैश्विक संपर्कों से परिचित कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।














