नई दिल्ली/न्यूयॉर्क (18 मार्च 2026): मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव के बावजूद बुधवार को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में एक अप्रत्याशित रुझान देखने को मिला। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 3% से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक निवेशकों और शेयर बाजारों में हलचल तेज हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय और भारतीय बाजार में तेल की कीमतें
बुधवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दोनों प्रमुख बेंचमार्क में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसका सीधा असर भारतीय वायदा बाजार पर भी दिखा:
| क्रूड का प्रकार / एक्सचेंज | मौजूदा कीमत | दर्ज की गई गिरावट |
| WTI क्रूड (अंतरराष्ट्रीय) | $92.40 प्रति बैरल | 3.28% |
| ब्रेंट क्रूड (अंतरराष्ट्रीय) | $100.99 प्रति बैरल | 2.35% |
| MCX (भारतीय बाजार) | ₹8,621 (20 अप्रैल 2026 कॉन्ट्रैक्ट) | 2.52% |
ईरान में बड़ी घटना से बढ़ा भू-राजनीतिक जोखिम
बाजार में इस उतार-चढ़ाव के बीच सबसे बड़ी खबर ईरान से है। ईरान के शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी की हत्या की पुष्टि हो गई है।
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उनकी मौत को ईरान के युद्ध नेतृत्व के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।
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इस घटना के बाद मध्य पूर्व में क्षेत्रीय संघर्ष के एक बड़े युद्ध में तब्दील होने की आशंकाएं चरम पर पहुंच गई हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर मंडराता खतरा
वैश्विक तेल बाजार की सबसे बड़ी चिंता ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को लेकर है।
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यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति की ‘शह-रग’ है, जहां से दुनिया के कुल ऑयल शिपमेंट का लगभग 20% (पांचवां हिस्सा) गुजरता है।
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वर्तमान में इस मार्ग से व्यापारिक जहाजों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित है। जहाजों की आवाजाही अब सामान्य व्यापारिक नियमों के बजाय पूरी तरह से भू-राजनीतिक घटनाओं और सैन्य गतिविधियों पर निर्भर हो गई है।
अमेरिका की रणनीति और आपूर्ति श्रृंखला पर अनिश्चितता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अपने सहयोगी देशों का समर्थन जुटाने के प्रयास फिलहाल कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन (Supply Chain) को सामान्य करने को लेकर भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है।
इस बीच, खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां अपने चरम पर हैं। एक ओर जहां ईरान अपने हमले लगातार बढ़ा रहा है, वहीं अमेरिकी सेना भी जलडमरूमध्य के आसपास स्थित मिसाइल ठिकानों को आक्रामक रूप से निशाना बना रही है।
महंगाई की मार: एक साल में 70% उछले दाम
भले ही बुधवार को कीमतों में गिरावट आई हो, लेकिन इस साल अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में करीब 70% तक का भारी उछाल आ चुका है। इसका सीधा असर अब आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। हालात यह हैं कि अमेरिका में डीजल की कीमतें 5 डॉलर प्रति गैलन के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई हैं।














