नई दिल्ली: सौर ऊर्जा (Solar Energy) के क्षेत्र में चीन और अन्य देशों पर आयात निर्भरता को खत्म करने तथा घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और रणनीतिक फैसला लिया है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) ढांचे का विस्तार करते हुए अब इसे ‘इंगॉट’ (Ingot) और ‘वेफर’ (Wafer) के निर्माण तक लागू कर दिया है।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे भारत के सोलर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है।
क्या है ALMM List-III और इसके प्रमुख प्रावधान? अब तक ALMM का नियम केवल सोलर मॉड्यूल और सेल पर लागू था, लेकिन अब इसे उत्पादन के शुरुआती चरणों (इंगॉट और वेफर) तक ले जाया गया है। इसके मुख्य नियम इस प्रकार हैं:
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लागू होने की तिथि: ALMM List-III को 1 जून 2028 से पूरे देश में लागू किया जाएगा।
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अनिवार्य उपयोग: इसके लागू होने के बाद सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त सोलर परियोजनाओं में केवल ALMM सूची में शामिल ‘वेफर’ का उपयोग करना अनिवार्य होगा।
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क्षमता की शर्त: यह नई सूची तभी जारी की जाएगी जब देश में कम से कम 3 स्वतंत्र निर्माण इकाइयां स्थापित हो जाएं और उनकी कुल उत्पादन क्षमता 15 गीगावाट (GW) तक पहुंच जाए।
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एकीकृत निर्माण: वेफर निर्माताओं के पास ‘इंगॉट’ निर्माण की क्षमता होना भी अनिवार्य किया गया है।
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सख्त नियम: भविष्य में ‘मॉड्यूल सूची’ में केवल उन्हीं उत्पादों को शामिल किया जाएगा, जो ALMM सूची के अधिकृत सेल और वेफर से बने होंगे।
देश और अर्थव्यवस्था को क्या होगा फायदा? सरकार के इस दूरदर्शी फैसले से ऊर्जा क्षेत्र में कई सकारात्मक बदलाव आएंगे:
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घरेलू निवेश में वृद्धि: देश में वेफर और इंगॉट निर्माण के प्लांट लगाने के लिए भारी निवेश आएगा।
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सुरक्षित सप्लाई चेन: सोलर सप्लाई चेन अधिक मजबूत, पारदर्शी और भू-राजनीतिक खतरों से सुरक्षित बनेगी।
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आयात में कमी: सौर उपकरणों के आयात पर भारत की निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।
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गुणवत्ता और रोजगार: सोलर उपकरणों की गुणवत्ता (Quality) और ट्रेसबिलिटी (Traceability) बेहतर होगी, साथ ही इस क्षेत्र में रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे।
ALMM की अब तक की सफलता और 2030 का लक्ष्य सरकार ने जानकारी दी है कि ALMM लागू होने के बाद से भारत में सोलर निर्माण में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। जहां साल 2021 में सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षमता मात्र 8.2 गीगावाट थी, वह अब बढ़कर करीब 172 गीगावाट तक पहुंच गई है। सोलर सेल की क्षमता भी इसी तेजी से बढ़ रही है। इंगॉट और वेफर को इस सूची में शामिल करने का यह कदम भारत के 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा (Non-fossil energy) क्षमता हासिल करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को एक मजबूत आधार प्रदान करेगा।














