नई दिल्ली : पश्चिम एशिया (Middle East) में पिछले 25 दिनों से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध और गहराते तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच टेलीफोन पर एक बेहद महत्वपूर्ण बातचीत हुई है। इस मौजूदा युद्ध के शुरू होने के बाद दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह पहली फोन वार्ता है।
पीएम मोदी का बयान: ‘शांति और स्थिरता की दिशा में करेंगे काम’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर इस बातचीत की जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति पर सार्थक विचारों का आदान-प्रदान हुआ है।
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पीएम मोदी ने लिखा: “राष्ट्रपति ट्रंप का फोन आया… भारत यथाशीघ्र तनाव कम करने और शांति बहाली का समर्थन करता है।”
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होर्मुज जलडमरूमध्य पर जोर: प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को खुला, सुरक्षित और सुलभ बनाए रखना न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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दोनों नेता इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के प्रयासों के तहत लगातार संपर्क में बने रहने पर सहमत हुए हैं।
अमेरिकी राजदूत ने भी दी जानकारी इससे पहले मंगलवार को भारत में अमेरिका के नवनियुक्त राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने भी एक्स (X) पर एक पोस्ट के जरिए इस वार्ता की पुष्टि की थी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी ने मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात पर विस्तार से चर्चा की, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और खुला नौवहन (Navigation) बनाए रखने की अहमियत प्रमुख थी।
भारत के लिए क्यों इतना अहम है ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’? ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट में किए जा रहे हमलों और ब्लॉकेज के कारण वैश्विक तेल और गैस सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। यह क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ‘शह-रग’ के समान है:
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ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर: भारत अपनी जरूरत का 60 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल और गैस इसी समुद्री मार्ग से आयात करता है।
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यदि यह मार्ग बंद होता है या यहाँ तनाव और बढ़ता है, तो भारत में ऊर्जा संकट और महंगाई बढ़ने का सीधा खतरा है।
संसद में पीएम मोदी का कड़ा संदेश: ‘डायलॉग और डिप्लोमेसी ही एकमात्र रास्ता’ भारत ने इस युद्ध में शुरुआत से ही तटस्थता बनाए रखते हुए संवाद और कूटनीति के जरिए विवाद सुलझाने पर बल दिया है।
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इसी सप्ताह, प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को लोकसभा और मंगलवार को राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान पश्चिम एशिया के इस संकट को “अत्यंत चिंताजनक” बताया था।
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उन्होंने संसद को आश्वस्त किया कि भारत इस मामले में सभी संबंधित पक्षों—ईरान, इजरायल, अमेरिका और खाड़ी देशों (Gulf Countries)—के साथ लगातार संपर्क में है और तनाव को कम करने के लिए हर संभव कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।














