विश्व योग दिवस कार्यक्रम श्रृंखला 2026 के अंतर्गत बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के न्यू इंटरनेशनल बॉयज हॉस्टल एवं सेंटर फॉर जेनेटिक डिसऑर्डर्स विभाग द्वारा नवयोग सूर्योदय सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में नाद योग चिकित्सा कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में प्रख्यात योग शिक्षक, नवयोग ग्राम के संस्थापक एवं श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रोफेसर योग गुरु नवदीप जोशी ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। वे आयुष मंत्रालय सहित कई राष्ट्रीय समितियों के सदस्य हैं और लगातार 365 दिनों तक प्रतिदिन 22 मिनट सूर्य नमस्कार करने के लिए एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योग गुरु नवदीप जोशी ने कहा कि प्राचीन भारतीय योग परंपरा में नाद योग का विशेष महत्व है और आज के समय में यह मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत प्रभावी पद्धति बनकर उभर रहा है। उन्होंने बताया कि ध्वनि और कंपन आधारित यह प्राचीन ध्यान विधि सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है।
उन्होंने कहा कि बच्चों में बढ़ती चिड़चिड़ापन, बेचैनी और हाइपरएक्टिविटी जैसी समस्याओं को नाद योग के नियमित अभ्यास से नियंत्रित किया जा सकता है। वहीं युवाओं में तनाव, मानसिक अस्थिरता और नशे की लत जैसी समस्याओं से निपटने में भी यह कारगर साबित हो रहा है।
महिलाओं के स्वास्थ्य पर चर्चा करते हुए डॉ. जोशी ने बताया कि नाद योग की विधियां सामान्य प्रसव और स्वस्थ शिशु के जन्म में सहायक हो सकती हैं। इसके साथ ही गर्भावस्था के दौरान मानसिक संतुलन और शारीरिक शक्ति को भी मजबूत बनाती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि नियमित नाद योग अभ्यास से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर सहित 40 से अधिक बीमारियों में लाभ देखा गया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि योग को आधुनिक चिकित्सा के पूरक उपचार के रूप में अपनाना अधिक प्रभावी होता है।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को “ॐ” जप, मंत्र ध्यान और ध्वनि पर एकाग्रता के माध्यम से नाद योग का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रतिभागियों ने इस अनुभव को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला बताया।
विशेषज्ञों के अनुसार नाद योग मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन, बेहतर नींद, मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली और आध्यात्मिक उन्नति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. अख्तर अली, डॉ. जे.पी. वर्मा, डॉ. बी.एस.वी. प्रसाद, डॉ. सी.बी. मलिक एवं डॉ. राकेश मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।















