नई दिल्ली। भारतीय योग संघ (Indian Yoga Association) के 7वें राष्ट्रीय सम्मेलन ‘सांगोष्ठी 2026’ के दूसरे दिन योग, अध्यात्म और स्वास्थ्य के विविध आयामों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। नई दिल्ली स्थित अध्यात्म साधना केंद्र में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर से 500 से अधिक योग विशेषज्ञों, विद्वानों और साधकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध योग गुरु डॉ. नवदीप जोशी ने नादयोग चिकित्सा पर व्यावहारिक सत्र का संचालन किया। उन्होंने नादयोग को शरीर, मन और प्राण ऊर्जा के संतुलन का प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि नियमित अभ्यास से व्यक्ति की आंतरिक ऊर्जा को जागृत करने, मानसिक शांति प्राप्त करने और जीवन में आनंद की अनुभूति बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
सत्र के दौरान प्रतिभागियों को नाद, श्वास, आंतरिक श्रवण और ध्यान की विभिन्न विधियों का अभ्यास कराया गया। डॉ. जोशी ने कहा कि नादयोग केवल एक साधना पद्धति नहीं, बल्कि व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य और आत्मिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण साधन है।
सम्मेलन में माँ डॉ. हंसा जयदेवन, पद्मश्री स्वामी भारत भूषण, प्रधानमंत्री योग पुरस्कार से सम्मानित प्रो. रमेश बिजलानी, जैन मुनि जय सागर, अध्यात्म साधना केंद्र के मुख्य ट्रस्टी एस. के. जैन, आयुष मंत्रालय के योग सर्टिफिकेट बोर्ड के निदेशक डॉ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत तथा प्रो. एस.पी. सिंह सहित अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व उपस्थित रहे।
सांगोष्ठी के दौरान योग केंद्रों की स्थापना और संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कानूनी प्रक्रियाओं, कराधान (Taxation), अनुपालन (Compliance) तथा संस्थागत प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने अनुभव साझा किए और योग संस्थानों के प्रभावी संचालन के लिए सुझाव दिए।
सम्मेलन में योग को जन-जन तक पहुंचाने, योग संस्थानों को सशक्त बनाने तथा योग आधारित जीवनशैली को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।















