नई दिल्ली। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत ने अपनी व्यापक रणनीति (ग्रैंड स्ट्रैटेजी) के जरिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता हासिल की है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने सदस्य देशों के विविध हितों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए बहुपक्षवाद को व्यावहारिक दिशा प्रदान की और वैश्विक मंच पर अपने बढ़ते रणनीतिक प्रभाव का स्पष्ट संदेश दिया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने ब्रिक्स को भू-राजनीतिक टकराव और बड़ी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा का मंच बनने से बचाते हुए सहयोग, विकास और वैश्विक साझेदारी पर केंद्रित रखा। नई दिल्ली की रणनीति बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और भारत को वैश्विक संकटों के समाधान में एक प्रमुख भागीदार के रूप में स्थापित करने पर आधारित रही।
भारत ने ‘स्ट्रैटेजिक डी-हाइफनेशन’ और ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी’ की नीति के माध्यम से सदस्य देशों के बीच मतभेदों के बावजूद आम सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई। इसके परिणामस्वरूप ब्रिक्स घोषणा पत्र में ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं और विकासशील देशों की चिंताओं को प्रमुखता से स्थान मिला।
शिखर सम्मेलन में भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि आतंकवाद के मुद्दे पर रही। ब्रिक्स घोषणा पत्र में आतंकवाद के सभी स्वरूपों और अभिव्यक्तियों की कड़े शब्दों में निंदा की गई। साथ ही अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का विशेष उल्लेख करते हुए उसकी कड़ी आलोचना की गई। घोषणा पत्र में सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों पर भी चिंता व्यक्त की गई तथा आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति दोहराई गई।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने राष्ट्रीय हितों और वैश्विक प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाकर यह सुनिश्चित किया कि ब्रिक्स मंच सहयोग, आर्थिक विकास और वैश्विक शासन सुधार जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहे। इससे भारत की एक जिम्मेदार, प्रभावशाली और स्वतंत्र वैश्विक शक्ति के रूप में छवि और मजबूत हुई है।















