नई दिल्ली — केंद्र सरकार ने आम और गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली चार आपातकालीन दवाओं समेत कुल 41 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (सीलिंग प्राइस) निर्धारित कर दी है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के इस फैसले से संक्रमण, हृदय रोग, सूजन, मधुमेह और विटामिन की कमी के इलाज में उपयोग होने वाली कई दवाएं अब निर्धारित कीमत से अधिक पर नहीं बिक सकेंगी।
मुख्य दवाओं की नई कीमतें
- इप्राट्रोपियम (COPD के इलाज में) — ₹2.96 प्रति मिलीलीटर
- सोडियम नाइट्रोप्रसाइड (उच्च रक्तचाप और हृदय विफलता के लिए) — ₹28.99 प्रति मिलीलीटर
- डिल्टियाजेम (उच्च रक्तचाप और एंजाइना के लिए) — ₹26.72 प्रति कैप्सूल
- पोविडोन आयोडीन (त्वचा संक्रमण और घाव देखभाल के लिए) — ₹6.26 प्रति ग्राम
कीमत में कमी वाली अन्य दवाएं
पैरासिटामोल, एटोरवास्टेटिन, एमोक्सिसिलिन, मेटफॉर्मिन, एसिक्लोफेनाक, पैरासिटामोल-ट्रिप्सिन-काइमोट्रिप्सिन मिश्रण, और एटोरवास्टेटिन-क्लोपिडोग्रेल जैसी दवाएं भी इस दायरे में आई हैं।
एनपीपीए के निर्देश
- जिन दवाओं का मौजूदा एमआरपी सीलिंग प्राइस से कम है, वे पुराने एमआरपी पर बिकेंगी।
- ब्रांडेड और जेनेरिक दवाएं दोनों तय की गई अधिकतम कीमत से ज्यादा में नहीं बेची जा सकेंगी।
- नई कीमतें जीएसटी मुक्त हैं, लेकिन लागू टैक्स अलग से जोड़ा जा सकता है।
- सभी खुदरा विक्रेताओं को नई कीमतें स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होंगी।
- उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें अतिरिक्त वसूली व ब्याज भी शामिल होगा।
मरीजों को राहत
सरकार का यह कदम किफायती स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लाखों मरीजों को सस्ती और आवश्यक दवाएं समय पर उपलब्ध होंगी, जिससे उनका आर्थिक बोझ कम होगा।


















