नई दिल्ली: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘राष्ट्रीय कृषि बाजार’ (e-NAM) योजना ने देश भर के किसानों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और उन्हें उपज का सही मूल्य दिलाने में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने संसद में बताया कि यह ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है।
आंकड़ों की जुबानी ई-एनएएम की महासफलता (फरवरी 2026 तक) संसद में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ई-एनएएम के जरिए होने वाले व्यापार ने रिकॉर्ड ऊंचाई छू ली है:
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पंजीकरण: अब तक इस प्लेटफॉर्म पर 1.80 करोड़ किसान और 2.72 लाख व्यापारी पंजीकृत हो चुके हैं।
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एफपीओ (FPOs): किसानों के 4,724 किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को भी इस डिजिटल मंच से जोड़ा गया है।
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व्यापार की मात्रा: योजना की शुरुआत से लेकर 28 फरवरी 2026 तक इस पोर्टल पर कुल 13.22 करोड़ मीट्रिक टन कृषि उत्पादों का व्यापार हुआ है।
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व्यापार का मूल्य: इस व्यापार का कुल मूल्य 4,82,350 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
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मंडियों का एकीकरण: अब तक 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की 1,656 वास्तविक थोक मंडियों को ई-एनएएम पोर्टल पर सफलतापूर्वक एकीकृत (Integrate) किया जा चुका है।
क्या है ई-एनएएम और किसानों को कैसे हो रहा फायदा? वर्ष 2016 में शुरू किया गया ई-एनएएम (e-NAM) एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है।
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यह किसानों को पारदर्शी ऑनलाइन बोली (Online Bidding) के माध्यम से देश भर के खरीदारों के एक बड़े समूह को अपनी उपज बेचने में सक्षम बनाता है।
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इससे किसानों को अपनी फसल का उचित और प्रतिस्पर्धी मूल्य मिलता है। साथ ही, बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है और बिक्री से प्राप्त राशि सीधे किसानों के बैंक खातों (Direct Bank Transfer) में जमा हो जाती है।
राजस्थान की मंडियों में AI और मशीन लर्निंग (ML) का उपयोग कृषि व्यापार में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का एक शानदार उदाहरण राजस्थान में देखने को मिला है। राज्य मंत्री ने बताया कि वर्तमान में राजस्थान की 134 ई-एनएएम मंडियां कृषि उत्पादों की गुणवत्ता जांच (Quality Check) के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) आधारित मशीनों का उपयोग कर रही हैं। इससे परीक्षण के समय में काफी कमी आई है। इस उन्नत तकनीक के लिए भारत सरकार की ओर से सहायता प्रदान की गई है।
मंडियों के बुनियादी ढांचे के लिए 75 लाख रुपये का अनुदान ई-एनएएम योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार मंडियों को भारी आर्थिक सहायता भी दे रही है।
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पोर्टल के साथ एकीकरण और आवश्यक विपणन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्यों को प्रति मंडी 75.00 लाख रुपये तक की अनुदान सहायता दी जाती है।
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इस राशि का उपयोग गुणवत्ता जांच प्रयोगशालाएं, इलेक्ट्रॉनिक वजन मशीनें, कंप्यूटर, प्रिंटर, सफाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग सुविधाएं, सॉफ्टवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर और खाद इकाइयों के निर्माण में किया जाता है।













