नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते (Trade Deal) से भारतीय अर्थव्यवस्था के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को बड़ी राहत मिली है। इस समझौते के तहत भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर, फुटवियर और जेनेरिक फार्मास्युटिकल्स को अमेरिकी बाजार में विशेष लाभ मिलेगा।
किसानों और निर्यातकों के लिए खुले दरवाजे इस डील ने भारतीय किसानों और मछुआरों के लिए अमेरिकी बाजार के दरवाजे और चौड़े कर दिए हैं। अमेरिका ने कई भारतीय कृषि उत्पादों पर शून्य शुल्क (Zero Duty) की सुविधा प्रदान की है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- मसाले, चाय, कॉफी, नारियल, काजू।
- फल-सब्जियां: आम, अमरूद, केला, पपीता, कीवी, मशरूम।
- अनाज: जौ, तिल, खसखस आदि। इसके अलावा, औद्योगिक उत्पादों जैसे डायमंड, स्मार्टफोन, मशीन पार्ट्स और एयरक्राफ्ट पार्ट्स को भी बिना किसी शुल्क के अमेरिकी बाजार में प्रवेश मिलेगा।
डेयरी और संवेदनशील कृषि क्षेत्र सुरक्षित सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस समझौते में भारतीय कृषि और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया है। दूध और दुग्ध उत्पाद, जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलें, मांस, पोल्ट्री, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, दालें और तिलहन जैसे संवेदनशील उत्पादों पर अमेरिकी आयात को कोई रियायत नहीं दी गई है। इससे भारतीय किसान विदेशी प्रतिस्पर्धा से पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
पीयूष गोयल का बयान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को “न्यायसंगत, संतुलित और भारत के हित में” बताया है। उन्होंने कहा कि इस डील का दोहरा उद्देश्य है—भारतीय निर्यात को बढ़ावा देना और घरेलू कृषि व डेयरी सेक्टर को सुरक्षित रखना।
भारत क्या आयात करेगा? भारत ने अमेरिका से कुछ चुनिंदा उत्पादों जैसे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (पशु आहार), कुछ विशेष वाइन और स्पिरिट्स, पिस्ता, अखरोट, बादाम, सेब और कपास के आयात की अनुमति दी है। हालांकि, घरेलू उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए इन पर न्यूनतम आयात मूल्य (Minimum Import Price) और अन्य सुरक्षा उपाय लागू रहेंगे।
भविष्य की संभावनाएं सरकार के अनुसार, इस समझौते से करीब 44 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय उत्पादों को शुल्क मुक्त लाभ मिलेगा। वहीं, अमेरिका से आने वाली हाई-टेक मेडिकल टेक्नोलॉजी और ऊर्जा उपकरणों से भारत को फायदा होगा। यह डील दोनों देशों के बीच व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने की दिशा में एक बड़ा और ठोस कदम मानी जा रही है।














