नई दिल्ली, अगस्त 23: केंद्र सरकार ने देश की सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना के तहत 23 चिप-डिजाइन परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
मंत्रालय के अनुसार, घरेलू स्टार्टअप और एमएसएमई के नेतृत्व वाली इन परियोजनाओं को निगरानी कैमरे, एनर्जी मीटर, माइक्रोप्रोसेसर आईपी और नेटवर्किंग एप्लीकेशन जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी चिप्स और सिस्टम-ऑन-चिप (SoC) सॉल्यूशन विकसित करने के लिए समर्थन मिल रहा है।
72 कंपनियों को मिली EDA टूल्स तक पहुंच
सरकार के बयान के मुताबिक, अब तक 72 कंपनियों को अपनी चिप डिजाइन परियोजनाओं के लिए इंडस्ट्री-स्टैंडर्ड इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स तक पहुंच प्रदान की गई है। इनमें से फैबलेस सेमीकंडक्टर कंपनी वर्वेसेमी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स ने अपने एडवांस्ड इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) पोर्टफोलियो की घोषणा की, जो भारत की सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता को गति देने और वैश्विक स्तर पर नवाचार को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएंगे।
2017 में स्थापित वर्वेसेमी, सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा (IP) का निर्यात करने वाली भारत की पहली कंपनियों में शामिल है। इसकी मशीन लर्निंग-संचालित एनालॉग चेन आईपी आज अग्रणी अंतरराष्ट्रीय उत्पादों में एकीकृत हैं।
“डिजाइन-इन-इंडिया” विज़न
वर्वेसेमी के संस्थापक और सीईओ राकेश मलिक ने कहा, “ये इनोवेशन भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ हैं। रणनीतिक और उपभोक्ता बाजारों के लिए भारत में निर्मित हाई-परफॉर्मेंस आईसी न केवल आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा देंगे, बल्कि ग्लोबल सेमीकंडक्टर स्टेज पर भारत की क्षमता का प्रदर्शन भी करेंगे।”
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय की ग्रुप कोऑर्डिनेटर (आरएंडडी) सुनीता वर्मा ने कहा, “भारत की महत्वाकांक्षा सेमीकंडक्टर डिजाइन में ग्लोबल लीडर बनने की है। हम ऐसे भविष्य की कल्पना कर रहे हैं, जहां दुनिया के हर डिवाइस में एक ‘डिजाइन-इन-इंडिया’ चिप हो।”






