तेहरान: मध्य पूर्व में जारी महायुद्ध अब एक बेहद खतरनाक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने वैश्विक व्यापार के सबसे अहम समुद्री मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) के पास स्थित ईरान के मिसाइल ठिकानों पर भारी बमबारी की है। यह विध्वंसक कार्रवाई अमेरिका के “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” (Operation Epic Fury) का हिस्सा है, जिसे अब समुद्री क्षेत्र में भी आक्रामक रूप से तेज कर दिया गया है।
‘बंकर-बस्टर’ बमों से तबाह किए एंटी-शिप मिसाइल ठिकाने अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस नए हमले में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए सीधा खतरा बन चुकी ईरानी एंटी-शिप मिसाइलों को निशाना बनाया गया।
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इन मिसाइल ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए अमेरिकी सेना ने अत्यधिक भारी वजन वाले ‘बंकर-बस्टर’ बमों का इस्तेमाल किया है, जो जमीन के गहराई में बने मजबूत और सुरक्षित ठिकानों को भी भेद सकते हैं।
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सेंटकॉम ने बताया कि नौसेना के विमानों ने समुद्र से सैकड़ों लड़ाकू उड़ानें भरकर यह साबित कर दिया है कि अमेरिका समुद्री मोर्चे से भी अपनी हवाई ताकत को लगातार बनाए रखने में सक्षम है।
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’: 28 फरवरी से अब तक का विनाश अमेरिकी राष्ट्रपति के सीधे निर्देश पर 28 फरवरी से शुरू हुए इस महा-अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान की सुरक्षा व्यवस्था को पंगु बनाना और उसके सैन्य बुनियादी ढांचे को तबाह करना है।
अभियान के खौफनाक आंकड़े:
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7,000 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमला: अब तक ईरान के सात हजार से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है।
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100 से ज्यादा ईरानी जहाज तबाह: ईरानी नौसेना को भारी नुकसान पहुंचाते हुए 100 से ज्यादा जहाजों को नष्ट या क्षतिग्रस्त किया गया है।
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6,500 से ज्यादा लड़ाकू उड़ानें: अमेरिकी वायुसेना और नौसेना अब तक 6.5 हजार से ज्यादा सॉर्टीज (Sorties) कर चुकी है।
हमलों के मुख्य निशाने (Targets): ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के मुख्यालय, बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स, एंटी-शिप मिसाइल ठिकाने, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य संचार नोड्स (Communication Systems)।
जल, थल और नभ: तीनों मोर्चों पर अमेरिका का शक्ति प्रदर्शन अमेरिका ने इस ऑपरेशन में अपने सबसे घातक और आधुनिक हथियारों का जखीरा झोंक दिया है:
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वायु सेना (Air Force): बी-1, बी-2 और बी-52 जैसे महाविनाशक बमवर्षक विमान; एफ-22 रैप्टर और एफ-35 जैसे फिफ्थ जनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट्स; और उन्नत निगरानी ड्रोन।
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नौसेना (Navy): समुद्र में परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत (Aircraft Carriers), परमाणु पनडुब्बियां (Submarines) और गाइडेड मिसाइल से लैस युद्धपोत।
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थल सेना (Army): जमीन पर दुश्मन के हमलों को नाकाम करने के लिए पैट्रियट (Patriot) और थाड (THAAD) जैसे उन्नत मिसाइल रक्षा सिस्टम, रॉकेट आर्टिलरी और एंटी-ड्रोन तकनीक।
होर्मुज स्ट्रेट पर क्यों है खास ध्यान? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया में तेल आपूर्ति की सबसे महत्वपूर्ण ‘शह-रग’ है। अमेरिकी सेना का एंटी-शिप मिसाइल ठिकानों पर खास ध्यान इसलिए है क्योंकि अगर ईरान इस रास्ते को ब्लॉक करता है या यहां कोई बाधा आती है, तो पूरी दुनिया की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) चरमरा जाएगी और तेल बाजार में हाहाकार मच सकता है।













