भारत के ई-कॉमर्स और छोटे कारोबारियों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने डाक के माध्यम से भेजे जाने वाले माल पर एक्सपोर्ट इंसेंटिव का दायरा बढ़ा दिया है। अब इलेक्ट्रॉनिक तरीके से डाक के जरिए किए गए निर्यात पर भी ड्यूटी ड्रॉबैक, आरओडीटीईपी और आरओएससीटीएल जैसी योजनाओं का लाभ मिलेगा।
इस फैसले से खासतौर पर एमएसएमई, छोटे व्यापारी और छोटे शहरों व दूरदराज के इलाकों से निर्यात करने वाले उद्यमियों को बड़ी राहत मिलेगी। डाक के जरिए कम मात्रा में सामान भेजने वाले निर्यातक अब बड़े निर्यातकों के बराबर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। इससे उनकी लागत घटेगी और विदेशी बाजारों तक पहुंच आसान होगी।
इन सुविधाओं को लागू करने के लिए CBIC ने डाक निर्यात (इलेक्ट्रॉनिक घोषणा और प्रसंस्करण) विनियम, 2022 में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत डाक के माध्यम से निर्यात किए गए माल पर अब सरल तरीके से शुल्क वापसी और अन्य प्रोत्साहन मिल सकेंगे। इस संबंध में 15 जनवरी 2026 को अधिसूचना जारी की गई है।
सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में ई-कॉमर्स निर्यात को मजबूत करने के लिए कई डिजिटल और नीतिगत सुधार किए हैं। विदेश व्यापार नीति 2023 में पहली बार डिजिटल व्यापार और सीमा पार ई-कॉमर्स को बढ़ावा देने के लिए अलग अध्याय जोड़ा गया है, जिसमें डाक, कोरियर और ई-कॉमर्स के जरिए निर्यात को आसान बनाने पर जोर दिया गया है।
वर्तमान में देश में सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत 28 विदेशी डाकघर अधिसूचित हैं और डाक निर्यात से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी तरह डिजिटल कर दी गई हैं। सितंबर 2024 से डाक निर्यात पर आईजीएसटी रिफंड प्रक्रिया भी स्वचालित हो चुकी है, जिससे निर्यातकों को रिफंड जल्दी मिलने लगा है।
ई-कॉमर्स निर्यात को और सरल बनाने के लिए CBIC और डाक विभाग ने मिलकर ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल शुरू किया है, जिसके तहत देशभर में 1,000 से अधिक डाक निर्यात केंद्र बनाए गए हैं। यह कदम छोटे कारोबारियों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने में मदद कर रहा है।
सरकार का यह निर्णय निर्यात को सरल, सस्ता और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे भारत के ई-कॉमर्स निर्यात को नई गति मिलने की उम्मीद है।



















