चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में थिरकन ललित कला केंद्र फाउंडेशन द्वारा आर्टिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सहयोग से प्रस्तुत भव्य नृत्य-नाट्य कार्यक्रम “शक्ति – द बर्निंग साइलेंस” ने दर्शकों को भावनाओं, कला और सामाजिक चेतना की अनूठी यात्रा पर ले जाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। शास्त्रीय नृत्य, प्रभावशाली अभिनय, भावपूर्ण अभिव्यक्तियों और सशक्त सामाजिक संदेश से सजी इस प्रस्तुति को दर्शकों ने भरपूर सराहना और स्टैंडिंग ओवेशन के साथ सम्मानित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक गणेश वंदना से हुआ। इसके बाद भरतनाट्यम, कथक, तराना और मुख्य नृत्य-नाटिका “शक्ति – द बर्निंग साइलेंस” की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय कला की समृद्ध विरासत से रूबरू कराया। प्रत्येक प्रस्तुति ने अध्यात्म, संस्कृति और संवेदनशील सामाजिक विषयों को कलात्मक रूप से मंच पर जीवंत किया।
मुख्य नृत्य-नाटिका “शक्ति – द बर्निंग साइलेंस” महिलाओं के मौन संघर्ष, साहस, आत्मबल और आंतरिक शक्ति की कहानी को दर्शाती है। प्रस्तुति के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि हर महिला के भीतर अदम्य शक्ति और परिवर्तन की क्षमता विद्यमान है। शास्त्रीय कलाओं के माध्यम से जागरूकता, आत्मविश्वास और भावनात्मक संवेदनशीलता का संदेश प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में नरेंद्र धंड, भूपिंदर सिंह (आईपीएस), एस.पी. राजशेखरन, अभिषेक शर्मा तथा गुरु मैय्या श्रीमती इल्ला पांडे उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने कलाकारों की प्रतिभा, अनुशासन और प्रस्तुति की उत्कृष्टता की सराहना की।
संस्था की आर्टिस्टिक डायरेक्टर रचिता राठौर ने बताया कि इस प्रस्तुति में लगभग 65 विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिनमें 6 वर्ष की आयु से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत वयस्क प्रतिभागी भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य बच्चों और युवाओं में भारतीय शास्त्रीय नृत्य कलाओं के प्रति रुचि विकसित करना तथा सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखना है।
उन्होंने सांस्कृतिक विभाग से आग्रह किया कि बच्चों और युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए अधिक मंच और अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भारतीय शास्त्रीय कलाओं से जुड़ सकें।
रचिता राठौर ने कहा कि कथक और भरतनाट्यम जैसी शास्त्रीय नृत्य विधाएं केवल मंचीय कला नहीं, बल्कि मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन, आत्मविश्वास और अनुशासन का माध्यम भी हैं। आज के तनावपूर्ण जीवन में ये कलाएं बच्चों और युवाओं के लिए सकारात्मक ऊर्जा और एकाग्रता का स्रोत बन रही हैं।
इस प्रस्तुति का क्रिएटिव डायरेक्शन आशीष शुक्ला ने किया, जबकि कोरियोग्राफी अनुश्री लाडिया भार्गव और स्वाति शर्मा द्वारा तैयार की गई। स्क्रिप्ट लेखन एवं प्रभावशाली नैरेशन पूनम पंत ने किया तथा तकनीकी और विश्लेषणात्मक मार्गदर्शन अरिजीत मुखर्जी ने प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन राकेश अरोड़ा ने किया।
कार्यक्रम के अंत में दर्शकों ने सभी कलाकारों और आयोजकों की जमकर सराहना की। कला प्रेमियों ने इस प्रस्तुति को भारतीय शास्त्रीय कला, सामाजिक जागरूकता और भावनात्मक अभिव्यक्ति का अद्भुत संगम बताते हुए इसे एक अविस्मरणीय अनुभव करार दिया।






