चंडीगढ़, 25 सितंबर 2025 : 1965 के भारत-पाक युद्ध में भारत की ऐतिहासिक विजय की हीरक जयंती बुधवार को वीर स्मृति, मुख्यालय पश्चिमी कमान, चंडीमंदिर में धूमधाम और गर्व के साथ मनाई गई।
कार्यक्रम की शुरुआत उन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने से हुई, जिन्होंने छह दशक पहले अद्वितीय साहस और सर्वोच्च बलिदान के साथ देश की रक्षा की थी। इस अवसर पर पूर्व सेना कमांडरों, थल सेनाध्यक्षों, वरिष्ठ पूर्व सैनिकों तथा पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम ने पुष्प अर्पित किए। इसके बाद हरियाणा के राज्यपाल श्री आशिम कुमार घोष ने भी शहीदों को नमन किया।
1965 के युद्ध में शामिल पूर्व सैनिकों ने भी अपने शहीद साथियों को श्रद्धांजलि दी, जिससे राष्ट्र की गहरी कृतज्ञता झलक उठी।
राज्यपाल श्री घोष ने पूर्व सैनिकों और सेवारत अधिकारियों-कर्मचारियों से बातचीत करते हुए भारतीय सेना की वीरता, समर्पण और अनुशासन की सराहना की। उन्होंने पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के मोर्चों पर पश्चिमी कमान की निर्णायक भूमिका को याद किया। इस दौरान उन्होंने परमवीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट कर्नल ए.बी. तारापोर (मरणोपरांत) और कंपनी क्वार्टरमास्टर हवलदार अब्दुल हमीद (मरणोपरांत) के साहस को विशेष रूप से उल्लेखित किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत राज्यपाल ने पश्चिमी कमान संग्रहालय का भी दौरा किया और 1965 युद्ध समेत विभिन्न अभियानों में कमान की भूमिका से अवगत हुए।
समारोह का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि 1965 के सैनिकों द्वारा प्रदर्शित साहस, समर्पण और बलिदान से प्रेरणा लेकर भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं को बनाए रखेगी और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।















