नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के मोती नगर स्थित डीएलएफ कैपिटल ग्रीन्स में रविवार (1 मार्च 2026) को ‘विराट हिंदू महासम्मेलन’ के पावन अवसर पर एक भव्य 51 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन किया गया। यह अनुष्ठान अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैदिक विद्वान, ‘अध्यात्म पथ’ के संपादक और सनातन चिंतन के प्रखर प्रवक्ता आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री जी के ब्रह्मत्व में अत्यंत भव्यता, अनुशासन और दिव्यता के साथ संपन्न हुआ।
वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान हुआ परिसर इस विराट यज्ञ में 51 दंपत्तियों ने पारंपरिक भारतीय वेशभूषा धारण कर विधिवत यज्ञ अनुष्ठान संपन्न किया। इस अवसर पर कन्या गुरुकुल (लोवाकलां) की 51 ब्रह्मचारिणी कन्याओं द्वारा सस्वर वैदिक मंत्रोच्चार किया गया, जिसने संपूर्ण परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा, असीम श्रद्धा और साधना के भाव से ओतप्रोत कर दिया।
यज्ञ: जीवन, समाज और प्रकृति के संतुलन का आधार महायज्ञ को संबोधित करते हुए आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री जी ने यज्ञ को ‘संसार की नाभि’ बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यज्ञ केवल एक कर्मकांड या धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को स्वार्थ से परमार्थ, संग्रह से त्याग और उपभोग से सहभागिता की ओर ले जाने वाला दर्शन है। आचार्य जी ने सनातन धर्म में वर्णित पाँच महायज्ञों का उल्लेख किया, जिनके माध्यम से व्यक्ति से लेकर संपूर्ण विश्व का कल्याण सुनिश्चित होता है:
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ब्रह्मयज्ञ
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देवयज्ञ
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पितृयज्ञ
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बलिवैश्वदेवयज्ञ
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अतिथियज्ञ
यज्ञ की वैज्ञानिक प्रासंगिकता और पर्यावरण शुद्धि आचार्य जी ने यज्ञ के वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आहुति में प्रयुक्त घृत (घी), समिधा और औषधीय जड़ी-बूटियाँ पूर्णतः विज्ञानसम्मत हैं।
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औषधीय आहुति: हवन सामग्री में प्रयुक्त नीम, गूगल, पीपल, बरगद, तुलसी, ब्राह्मी, अश्वगंधा, कपूर और चंदन जैसी औषधियां जब अग्नि में आहुत की जाती हैं, तो उनसे उत्पन्न वाष्प वायुमंडल के हानिकारक जीवाणुओं और विषाणुओं को निष्क्रिय कर देती है।
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आधुनिक शोध: उन्होंने बताया कि आधुनिक वैज्ञानिक शोध भी मानते हैं कि यज्ञ के धुएं में एंटी-बैक्टीरियल एवं एंटी-वायरल गुण होते हैं, जो वायु को शुद्ध करने के साथ-साथ मानसिक तनाव को भी दूर करते हैं।
‘स्नान से शरीर और यज्ञ से पर्यावरण की शुद्धि’ प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और मानसिक अशांति जैसी आधुनिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए आचार्य जी ने एक अत्यंत सटीक सूत्र दिया:
“शरीर की शुद्धि के लिए स्नान, मन की शुद्धि के लिए ध्यान, संपत्ति की शुद्धि के लिए दान और पर्यावरण की शुद्धि के लिए यज्ञ अनिवार्य है।”
सांस्कृतिक उत्सव और आयोजकों का योगदान महायज्ञ के पश्चात भव्य शोभायात्रा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, चित्रकला प्रतियोगिता और भक्ति भजनों का आयोजन किया गया, जिससे यह कार्यक्रम एक वृहद सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का उत्सव बन गया। अंत में सभी श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसाद की व्यवस्था की गई। इस विराट आयोजन को सफल बनाने में विराट हिंदू महासम्मेलन समिति और कैपिटल ग्रीन्स परिवार का विशेष योगदान रहा। आयोजन की व्यवस्थाओं में श्री धर्मवीर आचार्य, श्री मुकुल किशोर, श्री ज्योति कुमार भाटिया, श्री जयसिंह, श्री सुभाष नागपाल और श्रीमती दिव्या खन्ना की भूमिका उल्लेखनीय रही।
कार्यक्रम के समापन पर आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री जी ने शांति पाठ कराया और समाज को ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ का शक्तिशाली संदेश दिया।














