लीडिंग इंग्लिश दैनिक द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब सरकार ने अपनी भूमि पूलिंग नीति वापस लेने के महीनों बाद अब एक बड़ा कदम उठाते हुए पुराना भूमि अधिग्रहण कानून फिर लागू कर दिया है। सरकार मोहाली और न्यू चंडीगढ़ में बड़े पैमाने पर शहरी विस्तार के लिए 5,100 एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहित करने जा रही है। इसके तहत मोहाली में नौ नए सेक्टर और न्यू चंडीगढ़ में दो नई टाउनशिप विकसित की जाएंगी।
द ट्रिब्यून को एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि मोहाली में 4,059 एकड़ भूमि के अधिग्रहण के लिए भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिनियम, 2013 की धारा 11 के तहत अधिसूचना जारी कर दी गई है। वहीं न्यू चंडीगढ़ में पहले से अधिग्रहणाधीन 1,048 एकड़ भूमि के मुआवजा अवार्ड भी जल्द ही जारी होंगे।
मोहाली में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नजदीक एयरोट्रॉपोलिस एक्सटेंशन के ब्लॉक E से J तक 3,535 एकड़ भूमि ली जाएगी, जबकि 524 एकड़ भूमि सेक्टर 87 (व्यावसायिक), 101 (आंशिक) और 103 (औद्योगिक) के विकास के लिए अधिग्रहित की जाएगी। आवश्यक सोशल इंपैक्ट असेसमेंट पूरा हो चुका है और विशेषज्ञ समिति ने इसकी मंजूरी भी दे दी है।
न्यू चंडीगढ़ में 720 एकड़ भूमि के मुआवजा अवार्ड को अंतिम रूप दे दिया गया है, जिसकी जानकारी द ट्रिब्यून ने 10 जून को विशेष रिपोर्ट में प्रकाशित की थी। पूर्व भूमि पूलिंग नीति—जिसमें किसानों को नकद मुआवजे की बजाय विकसित प्लॉट देने का प्रावधान था—किसानों के तीखे विरोध और राजनीतिक दबाव के चलते अगस्त में वापस ले ली गई थी। इस नीति पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक भी लगा दी थी।
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, भूमि अधिग्रहण की यह नई कवायद हाल के वर्षों में सबसे बड़े प्रयासों में से है, जिसका उद्देश्य मोहाली व न्यू चंडीगढ़—जो राजधानी चंडीगढ़ से सटे हैं—में नियोजित शहरी विकास को तेज करना है। इस कदम के साथ 5,107 एकड़ भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में शामिल हो चुकी है, जिससे राज्य की विस्तार योजना अब वैधानिक मुआवजा, पारदर्शिता और निर्धारित विकास समयसीमा पर आधारित हो गई है।


















