नई दिल्ली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए पिछले 13 महीनों में 1,000 से अधिक रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं। एम्स प्रशासन ने मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि सर्जिकल विभाग में रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत एक वर्ष से अधिक समय पहले जटिल सर्जिकल चुनौतियों से निपटने के उद्देश्य से की गई थी।
एम्स के अनुसार, अत्याधुनिक सर्जिकल रोबोट की मदद से अब तक पैंक्रियाटिक ड्यूओडेनेक्टॉमी, गैस्ट्रेक्टॉमी, एसोफेगेक्टॉमी, कोलेक्टॉमी, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर के लिए एंटीरियर रिसेक्शन, किडनी ट्रांसप्लांटेशन और थायरॉयड, पैराथायरॉयड, एड्रेनल व पैंक्रियास के एंडोक्राइन ट्यूमर से जुड़े मिनिमली इनवेसिव ऑपरेशन किए जा चुके हैं।
एम्स ने कहा कि जहां दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों के निजी अस्पतालों में पिछले एक दशक से यूरोलॉजी और गायनेकोलॉजी जैसी विशेषताओं में रोबोटिक सर्जरी का उपयोग हो रहा है, वहीं सरकारी अस्पतालों में खासकर जनरल सर्जरी के क्षेत्र में इसका चलन सीमित रहा है। एम्स इस कमी को दूर करते हुए पब्लिक हेल्थकेयर सिस्टम में एडवांस रोबोटिक तकनीक को सफलतापूर्वक लागू कर रहा है, जिससे विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के मरीजों को भी इसका लाभ मिल रहा है।
सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर सुनील चुंबर ने बताया कि एम्स एक शैक्षणिक संस्थान है, जहां 100 से अधिक सर्जिकल रेजिडेंट प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। रोबोटिक सिस्टम की स्थापना से रेजिडेंट डॉक्टरों को रेजिडेंसी के दौरान ही नवीनतम तकनीक पर प्रशिक्षण का अवसर मिल रहा है, जिससे एम्स का ट्रेनिंग करिकुलम विश्व के अग्रणी मेडिकल संस्थानों के समकक्ष हो गया है।
उन्होंने कहा कि रोबोटिक सर्जरी के लाभों में कम रक्तस्राव, अस्पताल में कम समय तक भर्ती रहना और मरीजों का तेजी से स्वस्थ होना शामिल है।
एम्स के सर्जरी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. मोहित जोशी ने कहा कि एम्स देश का अग्रणी संस्थान होने के नाते नई तकनीकों को अपनाने में हमेशा आगे रहा है। उन्होंने बताया कि विभाग के लगभग सभी सर्जन रोबोटिक सर्जरी में प्रशिक्षित हैं और संस्थान में रोबोटिक प्रक्रियाओं के लिए एक समर्पित ऑपरेशन थिएटर भी उपलब्ध है।



















