चंडीगढ़, 16 जुलाई : उत्तराखंड के पारंपरिक लोक पर्व हरेला के अवसर पर कुमाऊं सभा, चंडीगढ़ और स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के खिलाड़ियों द्वारा सेक्टर 42 में एक विशेष पौधारोपण अभियान चलाया गया। हरेला पर्व प्रकृति, हरियाली और नए कृषि चक्र की शुरुआत का प्रतीक है और इसे भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह से भी जोड़ा जाता है।
इस अवसर पर उत्तरांचल उत्थान परिषद के संयोजक डॉ. प्रदीप तिवारी ने कहा कि “हरेला अब केवल कुमाऊं क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि जहां-जहां कुमाऊं के लोग बसे हैं, वहां इस पर्व को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व प्रकृति और मनुष्य के बीच घनिष्ठ संबंधों का प्रतीक बन गया है।”
परंपरा अनुसार, हरेला पर्व से 9 दिन पूर्व घरों में मिट्टी और बांस की टोकरियों में सात प्रकार के अनाज बोए जाते हैं। 10वें दिन उगे हुए हरेले की बालियों को मंदिर में अर्पित किया जाता है और फिर आशीर्वाद स्वरूप परिजनों के सिर पर रखा जाता है। यह पर्व नई फसलों के शुभारंभ और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का दिन है।
इस पौधारोपण अभियान के दौरान लगभग 100 वृक्ष – फलदार, छायादार और औषधीय प्रजातियों के – लगाए गए। सभी प्रतिभागियों ने अगले दो वर्षों तक पौधों की देखभाल करने की शपथ भी ली।

सभा के मीडिया प्रभारी शशि प्रकाश पांडेय ने बताया कि इस कार्यक्रम में कुमाऊं सभा की कार्यकारिणी, सलाहकार सदस्य, महिला शक्ति, हैंडबॉल कोच नंदलाल वर्मा और उनके खिलाड़ी, ग्रीन इंडिया ग्रेट इंडिया टीम के पदाधिकारी आदि उपस्थित थे।
सभा के अध्यक्ष मनोज रावत ने कहा, “पर्यावरण संरक्षण हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें सिर्फ पेड़ नहीं लगाने, बल्कि नदियों, झीलों और पहाड़ों को भी प्लास्टिक व प्रदूषण से मुक्त करना होगा।”
महासचिव दीपक परिहार ने कहा कि “सभा का प्रयास रहेगा कि हमारी नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और मूल्यों से जुड़ी रहे।”
हैंडबॉल कोच नंदलाल वर्मा ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि “एक अच्छा खिलाड़ी बनने के साथ-साथ सामाजिक दायित्वों का निर्वहन भी जरूरी है।” कार्यक्रम के अंत में कुमाऊं सभा द्वारा मिठाइयां बांटकर सबका मुंह मीठा कराया गया और पर्व को उल्लासपूर्वक मनाया गया।


















