चंडीगढ़: पंजाब विश्वविद्यालय में चल रहे तनावपूर्ण माहौल के बीच आज हरियाणा के छात्र-छात्राओं ने एक बैठक कर महत्वपूर्ण निर्णय लिए। बताया गया कि कुछ लोग — जिनके विद्यार्थी होने की पुष्टि प्रशासन पूरी तरह नहीं कर पाया है — विश्वविद्यालय परिसर में माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। ये लोग पीयू को केवल पंजाब का बताकर हरियाणा के छात्रों और हरियाणा की भागीदारी का मज़ाक उड़ा रहे हैं, जिससे हरियाणा के छात्रों में असंतोष बढ़ रहा है।
हरियाणा डोमिसाइल छात्र-छात्राओं और पूर्व छात्रों ने पंजाब विश्वविद्यालय को केवल पंजाब का बताने वाले बयानों की कड़ी निंदा की
हरियाणा डोमिसाइल छात्र-छात्राओं और पूर्व छात्रों ने उन बयानों का कड़ा विरोध किया है जिनमें दावा किया जा रहा है कि पंजाब विश्वविद्यालय केवल पंजाब का है। उन्होंने इस कथन को न केवल गलत बल्कि विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक सच्चाई के विरुद्ध बताया।
छात्रों ने स्पष्ट किया कि पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में स्थित है — जो पंजाब और हरियाणा दोनों की संयुक्त राजधानी है — और विश्वविद्यालय की स्थापना राज्य पुनर्गठन (1966) से पहले हुई थी। उन्होंने कहा कि हरियाणा के कई क्षेत्र जो पहले पंजाब विश्वविद्यालय से संबद्ध थे, उसके प्रमाण आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं।
छात्रों और पूर्व छात्रों का कहना है, “हरियाणा का पंजाब विश्वविद्यालय पर समान ऐतिहासिक, अकादमिक और नैतिक अधिकार है। हम यहां पढ़े हैं, फीस जमा की है, और विभिन्न मंचों पर विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया है। हम ही वास्तविक हितधारक हैं।”
उन्होंने मांग की कि भविष्य में भारत सरकार द्वारा किए जाने वाले किसी भी ढांचागत सुधार या अधिसूचना में हरियाणा के छात्रों एवं पूर्व छात्रों की भागीदारी और अधिकारों को मान्यता दी जाए।
साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि बाहरी राजनीतिक दबाव समूहों को विश्वविद्यालय को किसी एक राज्य की संस्था बनाने के प्रयास की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक हितधारकों — छात्रों एवं पूर्व छात्रों — को शामिल किया जाना आवश्यक है।
अंत में, उन्होंने दोहराया कि पंजाब विश्वविद्यालय किसी एक राज्य की संपत्ति नहीं है, बल्कि केंद्र शासित प्रदेश में स्थित एक ऐतिहासिक संस्थान है, जिसकी पहचान समावेशी और सभी के लिए खुली होनी चाहिए।



















