नई दिल्ली। देश की रक्षा क्षमता को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। सोमवार को पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR) का प्रथम उड़ान परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित Integrated Test Range में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह उन्नत रॉकेट प्रणाली Defence Research and Development Organisation (DRDO) द्वारा विकसित की गई है, जिसे लंबी दूरी तक सटीक और प्रभावी प्रहार के लिए डिजाइन किया गया है।
सभी तकनीकी मानकों पर खरा उतरा
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, परीक्षण के दौरान रॉकेट ने सभी तकनीकी मापदंडों को सफलतापूर्वक पार किया और निर्धारित लक्ष्य क्षेत्रों तक अपनी उच्च सटीकता साबित की। पिनाका LRGR 120 पारंपरिक पिनाका मल्टी-बैरेल रॉकेट सिस्टम का उन्नत संस्करण है, जिसमें अत्याधुनिक गाइडेंस सिस्टम, बेहतर रेंज, उन्नत नेविगेशन और अधिक सटीकता शामिल है। यह प्रणाली कठिन युद्ध परिस्थितियों में भी प्रभावी प्रदर्शन देने में सक्षम है।
सेना की मारक क्षमता में बड़ा बदलाव
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस सफलता से भारतीय थलसेना को लंबी दूरी की सटीक हमलावर क्षमता प्राप्त होगी, जो सीमा सुरक्षा और आधुनिक रणभूमि की आवश्यकताओं के अनुरूप है। प्रणाली के पूर्ण विकास के बाद इसे सेना में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त होगा। परीक्षण के दौरान रेंज पर तैनात उन्नत ट्रैकिंग उपकरणों ने पूरी उड़ान के दौरान रॉकेट की ट्रैजेक्टरी की सतत निगरानी की।
मानक पिनाका लॉन्चर से सफल फायरिंग
विशेष रूप से, इस परीक्षण में LRGR को सेना में मौजूद मानक पिनाका लॉन्चर से दागा गया, जिससे यह सिद्ध हुआ कि एक ही लॉन्चर से विभिन्न रेंज वाले पिनाका रॉकेट लॉन्च किए जा सकते हैं। परीक्षण का समन्वय ITR और प्रूफ एवं एक्सपेरिमेंटल एस्टैब्लिशमेंट द्वारा किया गया।
डीआरडीओ टीम का संयुक्त प्रयास
यह रॉकेट आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट द्वारा विकसित किया गया है, जिसमें हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी और रिसर्च सेंटर इमारत का सहयोग रहा।
रक्षा मंत्री की बधाई
परीक्षण की सफलता पर रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने DRDO और सभी संबद्ध संगठनों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि स्वदेशी रक्षा तकनीक को नई ऊंचाई देती है और राष्ट्र की सामरिक शक्ति को और अधिक विश्वसनीय बनाती है। उन्होंने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए सशस्त्र बलों की मारक क्षमता बढ़ाने वाला मील का पत्थर करार दिया।
डीआरडीओ प्रमुख का बयान
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव एवं DRDO के अध्यक्ष Samir V. Kamat ने मिशन की सफलता पर वैज्ञानिकों और तकनीकी टीमों को बधाई दी और इसे भारतीय स्वदेशी रक्षा तकनीक की बड़ी उपलब्धि बताया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पिनाका LRGR 120 का सफल परीक्षण भारतीय थलसेना की आर्टिलरी क्षमता को निर्णायक बढ़त देगा और भविष्य के युद्ध परिदृश्यों में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।













