नई दिल्ली, अगस्त 23: दूसरे राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस (National Space Day) समारोह के तहत, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार को “Leveraging Space Technology and Applications for Viksit Bharat 2047” विषय पर National Space Meet 2.0 का आयोजन भारत मंडपम, नई दिल्ली में किया। यह आयोजन चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर की सफल सॉफ्ट लैंडिंग की याद में किया गया।
यह सम्मेलन ऐतिहासिक साबित हुआ, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों, निजी क्षेत्र, अकादमिक जगत, स्टार्टअप और विशेषज्ञों ने भाग लिया और अगले दशक के लिए भारत की स्पेस एप्लीकेशन्स की रूपरेखा तैयार की। इससे पहले 2015 में ऐसा राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ था, जिसने पिछले दशक में शासन और सुधारों के लिए अंतरिक्ष आधारित समाधान को दिशा दी थी।
‘Whole-of-Government’ दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव श्री पी.के. मिश्रा ने कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा मंत्रालयों, राज्यों, उद्योगों, वैज्ञानिकों और स्टार्टअप्स के सामूहिक संकल्प का उदाहरण है। उन्होंने बताया कि 2014 में जहां सिर्फ 1-2 स्पेस स्टार्टअप थे, वहीं आज उनकी संख्या 350 से अधिक हो गई है। उन्होंने राष्ट्रीय स्पेस मीट को नियमित रूप से आयोजित करने और इसमें निजी क्षेत्र की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स की भूमिका
IN-SPACe के चेयरमैन पवन गोयंका ने कहा कि यह महज कॉन्फ्रेंस नहीं, बल्कि समस्याओं को हल करने का व्यावहारिक अभ्यास है। उन्होंने सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर काम करने का आह्वान किया और कहा कि अंतरिक्ष तकनीक को हर किसान, छात्र और नागरिक तक पहुंचाना ही असली लक्ष्य है।
ISRO का विज़न 2040
ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा को थुम्बा (1963) से लेकर मौजूदा 55 सक्रिय उपग्रहों तक की उपलब्धियों से जोड़ा। उन्होंने घोषणा की कि 2040 तक भारत रॉकेट, सैटेलाइट और एप्लीकेशन के क्षेत्र में वैश्विक नेताओं की बराबरी करेगा और 119 नए उपग्रहों की तैनाती का रोडमैप रखा।
नीति और सुधार
डॉ. वी.के. सारस्वत (नीति आयोग सदस्य) ने कहा कि भारत ने Geospatial Policy 2022, Indian Space Policy 2023 और IN-SPACe जैसी ऐतिहासिक सुधारों से स्पेस सेक्टर को साझेदारी आधारित मॉडल की ओर मोड़ा है। उन्होंने स्पेस सुरक्षा और ग्लोबल सहयोग के लिए International Alliance on Space बनाने का सुझाव भी दिया।
आगे की राह
समापन सत्र में कहा गया कि अगले वर्षों में भारत:
- तीन गुना अधिक उपग्रह स्थापित करेगा,
- Earth Observation, SATNAV और SATCOM सेवाओं का विस्तार करेगा,
- और Viksit Bharat 2047 के लिए स्पेस टेक्नोलॉजी को शासन और नागरिक सेवाओं का अभिन्न हिस्सा बनाएगा।






