नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ में हिस्सा लिया। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा का अनावरण किया, जिसने ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा का स्थान लिया है।
औपनिवेशिक प्रतीकों की विदाई राष्ट्रपति के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर दी गई जानकारी के अनुसार, यह नई प्रतिमा अशोक मंडप के पास ग्रैंड ओपन सीढ़ी पर स्थापित की गई है। राष्ट्रपति मुर्मु ने इस बात पर जोर दिया कि यह कदम औपनिवेशिक काल की विरासत (Colonial Legacy) के अवशेषों को मिटाने और देश के इतिहास को आकार देने वाले प्रख्यात भारतीय नेताओं को उनका उचित सम्मान देने के व्यापक राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा है। यह पहल भारत की समृद्ध संस्कृति और शाश्वत परंपराओं को गर्व से अपनाने का प्रतीक है।
कौन थे सी. राजगोपालाचारी? चक्रवर्ती राजगोपालाचारी एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, दूरदर्शी राजनेता और प्रखर विद्वान थे। उन्होंने 1948 से 1950 तक भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल के रूप में कार्य किया। उनके जीवन और भारत माता की सेवा में उनके असाधारण योगदान को इस उत्सव के माध्यम से सम्मानित किया जा रहा है।
प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति इस भव्य समारोह में देश के कई शीर्ष नेता और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे:
-
उपराष्ट्रपति: सी.पी. राधाकृष्णन
-
केंद्रीय मंत्री: जे.पी. नड्डा (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण), डॉ. एस. जयशंकर (विदेश मंत्री), धर्मेंद्र प्रधान (शिक्षा मंत्री), गजेंद्र सिंह शेखावत (संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री)
-
राज्य मंत्री: डॉ. एल. मुरुगन (सूचना एवं प्रसारण)
-
इनके अलावा, राजाजी के परिवार के सदस्य भी इस गौरवमयी पल के साक्षी बने।
उपराष्ट्रपति का संदेश उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी ‘एक्स’ पर इस कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि लुटियंस की जगह राजाजी की प्रतिमा का अनावरण, औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति की हमारी यात्रा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस आयोजन ने गणतंत्र की प्रमुख संस्थाओं के भीतर भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को सुदृढ़ करने पर सरकार के निरंतर जोर को स्पष्ट किया है।














