वाशिंगटन/मुंबई: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार नीति में बड़ा बदलाव करते हुए हाल ही में लागू किए गए ग्लोबल टैरिफ (वैश्विक आयात शुल्क) को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। ट्रंप प्रशासन ने यह कदम अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके पहले के व्यापक टैरिफ प्रावधानों को खारिज किए जाने के ठीक एक दिन बाद उठाया है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और उसका प्रभाव वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप प्रशासन के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी आर्थिक शक्तियां अधिनियम’ के तहत व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार मांगा गया था। मुख्य न्यायाधीश जॉन जी. रॉबर्ट्स जूनियर ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को मनमाने तरीके से असीमित शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। इस फैसले से अब उन 130 अरब डॉलर के आयात कर के रिफंड को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
नए टैरिफ का कानूनी आधार (धारा 122) सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद, ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 का इस्तेमाल किया है। यह प्रावधान राष्ट्रपति को बिना कांग्रेस की मंजूरी के 150 दिनों तक 15 प्रतिशत तक का अस्थायी शुल्क लगाने की अनुमति देता है। नियम के अनुसार, इसे किसी एक देश को लक्षित करने के बजाय सभी आयातों पर समान रूप से लागू किया जाएगा, हालांकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी वस्तुओं (जैसे स्टील और ऑटोमोबाइल) पर यह अतिरिक्त शुल्क लागू नहीं होगा।+1
भारतीय शेयर बाजार पर प्रभाव (Impact on Indian Stock Market)
ट्रंप के इस ‘प्लान बी’ का भारतीय शेयर बाजार (BSE Sensex और NSE Nifty) पर तत्काल और मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है:
- बाजार में सतर्कता और उतार-चढ़ाव: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निवेशकों को पहले एक बड़ी राहत मिली थी, क्योंकि 25% से 50% तक के पुराने कठोर टैरिफ अमान्य हो गए थे। लेकिन ट्रंप के 15% के नए ‘अस्थायी सरचार्ज’ ने बाजार में फिर से अनिश्चितता (Volatility) पैदा कर दी है। ग्लोबल मार्केट क्रैश के डर के बीच भारतीय बाजार सतर्क रुख अपना रहे हैं।
- प्रमुख सेक्टर्स पर दबाव: अमेरिका को निर्यात करने वाले भारतीय श्रम-प्रधान और निर्यात-आधारित सेक्टर्स जैसे ऑटो एंसिलरी (ऑटो पार्ट्स), टेक्सटाइल, लेदर, और जेम्स एंड ज्वेलरी पर दबाव बढ़ सकता है। इन कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
- राहत की गुंजाइश: चूंकि अमेरिका ने कुछ कृषि उत्पादों, ऊर्जा और फार्मास्युटिकल सामग्री (Pharma Ingredients) को इस 15% सरचार्ज से बाहर रखने का संकेत दिया है, इसलिए भारतीय फार्मा सेक्टर और आईटी सेक्टर के शेयरों में कुछ हद तक स्थिरता या मजबूती देखने को मिल सकती है।
- ट्रेड डील पर नजर: भारत और अमेरिका के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता (Trade Deal) पर बाजार की पैनी नजर है। जब तक यह 150 दिनों का अस्थायी टैरिफ लागू है, निवेशक लंबी अवधि की रणनीति (Long-term Strategy) अपनाने पर जोर दे रहे हैं।














