चंडीगढ़: पंजाब यूनिवर्सिटी के अकादमिक कैलेंडर के अनुसार संबद्ध कॉलेजों में नए शैक्षणिक सत्र की कक्षाएं 18 जुलाई से शुरू हो जानी चाहिए थीं, लेकिन कई कॉलेजों में अभी तक नियमित शिक्षण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। कई संस्थानों में टाइम-टेबल तक तैयार नहीं हुआ है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
डीएवी कॉलेज, सेक्टर-10 की कार्यकारी प्रिंसिपल डॉ. मोना नारंग द्वारा 22 जुलाई को जारी पत्र के अनुसार, स्नातक (यूजी) कक्षाएं 27 जुलाई से और स्नातकोत्तर (पीजी) कक्षाएं 31 जुलाई से शुरू होंगी। वहीं एसडी कॉलेज, सेक्टर-32 के प्रिंसिपल डॉ. अजय शर्मा के 22 जुलाई के पत्र के अनुसार पुराने विद्यार्थियों की कक्षाएं 28 जुलाई से तथा नए विद्यार्थियों की कक्षाएं 30 जुलाई से 3 अगस्त के बीच शुरू की जाएंगी।
दूसरी ओर श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज, सेक्टर-26 से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रिंसिपल, सुपरिंटेंडेंट और एडमिशन हेल्पलाइन से संपर्क नहीं हो सका।
इस स्थिति ने पंजाब यूनिवर्सिटी के अकादमिक कैलेंडर के पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि संबद्ध कॉलेज अपनी सुविधा के अनुसार कक्षाएं शुरू कर रहे हैं, तो निर्धारित अकादमिक कैलेंडर की उपयोगिता पर प्रश्न उठ रहे हैं।
स्थिति को और गंभीर बनाते हुए कई विषयों में अभी भी असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति के बिना नियमित कक्षाएं कैसे संचालित होंगी।
यूजीसी के नियमों के अनुसार विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में वर्ष के दौरान कम से कम 180 दिन का शिक्षण कार्य होना आवश्यक है। ऐसे में देरी से शुरू हो रही कक्षाओं के कारण इस मानक के पालन पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
इसी बीच चंडीगढ़ के आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. राजिंदर के. सिंगला ने विद्यार्थियों के साथ कथित अन्याय और यूजीसी नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों को लेकर संबंधित अधिकारियों को कई आरटीआई आवेदन और शिकायतें भेजी हैं। उनका आरोप है कि विद्यार्थियों से कम उपस्थिति के आधार पर जुर्माना वसूला जाता है, जबकि संस्थानों की ओर से समय पर कक्षाएं संचालित नहीं की जातीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए और विद्यार्थियों के शैक्षणिक नुकसान की भरपाई पर भी विचार होना चाहिए।
हालांकि, कॉलेजों और पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से इन मुद्दों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया आना शेष है।















