जगत सद्भावना संस्थान के सानिध्य में पूज्य महाराज श्री जी के जन्मदिवस के पावन अवसर पर श्रीहरिमंदिर, सेक्टर 12 ए, पंचकूला में भव्य श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के पांचवें दिन सद्भावना दूत भागवताचार्य स्वामी डॉ. रमनीक कृष्ण जी महाराज ने श्रद्धालुओं को रसपान कराते हुए ब्रह्मा जी के मोह भंग की परम पावन कथा सुनाई।
महाराज जी ने प्रसंग सुनाते हुए बताया कि एक बार बाल सखाओं के साथ गौचारण के समय भगवान श्रीकृष्ण ने सभी से अगले दिन घर से कुछ खाने को लाने को कहा। कृष्ण के सखा ‘मनसुखा’ के घर में अत्यधिक अभाव था, इसलिए उनकी मैया ने कई दिनों की बासी छाछ से ही कड़ी बना दी। जब सभी सखा ठाकुर जी को सुंदर-सुंदर पकवान अर्पित कर रहे थे, तब मनसुखा संकोचवश अपनी बासी कड़ी छुपाने लगा। कान्हा के आग्रह करने पर जब मनसुखा ने परिहास के डर से पूरी कड़ी अपने मुख में भर ली, तो अंतर्यामी प्रभु ने मनसुखा का मुख दबाकर वह सारी कड़ी स्वयं पा ली।
आकाश से इस दृश्य को देख रहे ब्रह्मा जी को आश्चर्य हुआ कि किसी का जूठा खाने वाले यह कैसे भगवान हो सकते हैं? परीक्षा लेने के उद्देश्य से ब्रह्मा जी ने समस्त बाल-ग्वालों और बछड़ों को चुराकर ब्रह्मलोक में छिपा दिया। एक वर्ष बाद जब ब्रह्मा जी ने लौटकर देखा, तो श्रीकृष्ण अपने संकल्प से वैसे ही नए ग्वाल-बाल और बछड़े प्रकट कर पुनः लीला कर रहे थे। यह देखकर ब्रह्मा जी का अभिमान चूर हो गया। उन्हें ज्ञात हुआ कि श्रीकृष्ण ही पूर्ण परात्पर परब्रह्म हैं। इसके बाद उन्होंने दंडवत प्रणाम कर प्रभु से क्षमा मांगी। आज कथा के विशेष अवसर पर श्रीगिरिराज जी महाराज को भव्य छप्पन भोग अर्पित किए गए और कथा विश्राम के बाद विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।















