मुंबई : बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर ने आज राजभवन, मुंबई में आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र के नए राज्यपाल के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। विशेष बात यह रही कि आचार्य देवव्रत ने शपथ संस्कृत भाषा में ली, जिससे समारोह में सांस्कृतिक और वैदिक परंपरा की गरिमा और भी बढ़ गई।
आचार्य देवव्रत महाराष्ट्र के 22वें राज्यपाल बने हैं। उन्होंने सी.पी. राधाकृष्णन का स्थान लिया है, जिन्हें हाल ही में भारत का उपराष्ट्रपति निर्वाचित किया गया है।
शपथ ग्रहण समारोह में राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री, न्यायपालिका के प्रतिनिधि, शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी, गणमान्य नागरिक और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
आचार्य देवव्रत का परिचय
आचार्य देवव्रत का जन्म हिमाचल प्रदेश के ऊना ज़िले में हुआ था। वे लंबे समय तक आर्य समाज और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े रहे। उन्होंने कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल कुरुक्षेत्र में प्रधानाचार्य रहते हुए पारंपरिक वैदिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दिया।
सामाजिक जीवन में उनका योगदान विशेष रूप से प्राकृतिक खेती, नशामुक्ति अभियान, और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार से जुड़ा रहा है। किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करने में उनकी अहम भूमिका रही है।
उनका राजनीतिक-संवैधानिक सफर 2015 में शुरू हुआ जब उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया। इसके बाद वे 2019 में गुजरात के राज्यपाल बने। अब 2025 में उन्होंने महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण किया है।
उनका जीवन भारतीय संस्कृति, शिक्षा, समाज सुधार और प्रशासनिक सेवाओं के संतुलन का प्रतीक माना जाता है।













