मनीमाजरा। अश्विनी मास के पावन अवसर पर जगत सद्भावना संस्थान के सानिध्य में प्राचीन श्रीशिव ठाकुर द्वारा मंदिर, मनीमाजरा में पितृ तर्पण श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। प्रथम दिवस की कथा में सद्भावना दूत भागवताचार्य डॉ. रमनीक कृष्ण जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के महात्म्य का वर्णन किया।
उन्होंने पद्मपुराण का संदर्भ देते हुए बताया कि जो मनुष्य प्रतिदिन श्रीमद्भागवत का एक श्लोक, आधा श्लोक या केवल एक पंक्ति भी पढ़ता है, वह कपिला गाय के दान का फल प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि कलियुग में मनुष्य जीवन अनेक द्वंद्वों, विषाद और भौतिक दौड़ में उलझा हुआ है। कामनाओं की पूर्ति न होने पर अवसाद उत्पन्न होता है और माया प्रत्येक मनुष्य को जकड़े रहती है। ऐसे में पुराण साहित्य ही मनुष्य मन को जागृत करने का श्रेष्ठ उपाय है।
महाराज ने स्पष्ट किया कि “पुराण वह है जो पुराना होते हुए भी हर बार नया अनुभव कराए। श्रीमद्भागवत महापुराण, जिसमें 12 स्कंध, 335 अध्याय और 18 हजार श्लोक हैं, साक्षात् भगवान श्रीहरि का वांग्मय स्वरूप है और प्रत्येक मनुष्य को इसका सप्ताह अवश्य श्रवण करना चाहिए।”
कथा से पूर्व मंगल कलश यात्रा का आयोजन हुआ, जिसमें 108 मातृ शक्तियों ने सिर पर कलश धारण कर भव्य यात्रा निकाली। यात्रा के दौरान वातावरण हरि-नाम संकीर्तन से गुंजायमान हो उठा।














