नई दिल्ली, अगस्त 21: नये विधेयक को लेकर संसद और सियासी गलियारों में जमकर घमासान मचा हुआ है। सरकार और विपक्ष दोनों एक-दूसरे पर तीखे आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं।
चर्चा के दौरान कुछ नेताओं ने सवाल उठाया कि “अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विपक्ष चोर कहता है, तो फिर वे जिस नये कानून को लेकर आए हैं, उसका विरोध क्यों किया जा रहा है?” विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा गया कि “मोदी अगर चोर हैं तब भी क़ानून बना रहे हैं और विपक्ष अगर साहूकार है तो फिर उसका विरोध क्यों कर रहा है?”
यह बयान आते ही सदन का माहौल गरमा गया। सत्ता पक्ष ने इसे विपक्ष की दोहरी राजनीति करार दिया, वहीं विपक्ष ने इसे जनता को गुमराह करने वाली बयानबाज़ी बताया।
इसी बीच, आम जनता अब यह सोच रही है कि इस नये क़ानून से आपत्ति किसको और क्यों होनी चाहिए। सरकार का दावा है कि यह बिल जनहित और पारदर्शिता के लिए ज़रूरी है, जबकि विपक्ष कई प्रावधानों को जनविरोधी करार दे रहा है।
सियासी आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब यह देखना अहम होगा कि बिल पास कराने में सरकार को कितना समर्थन मिलता है और विपक्ष किस तरह अपना विरोध दर्ज कराता है।














