जगत सद्भावना संस्थान के सानिध्य में पूज्य महाराज श्री जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास, सद्भावना दूत भागवताचार्य स्वामी डॉ. रमनीक कृष्ण जी महाराज ने श्रद्धालुओं को सूर्यवंश की दिव्य वंशावली और भगवान श्रीराम के प्राकट्य की कथा श्रवण कराई।
महाराज जी ने कथा की शुरुआत करते हुए सूर्यवंश के प्रतापी राजा इक्ष्वाकु, अनेजा और राजा सगर के प्रसंग से की। उन्होंने बताया कि राजा सगर के साठ हजार पुत्र कपिल मुनि के क्रोध से भस्म हो गए थे। उन्हें मोक्ष दिलाने के लिए अंशुमान और राजा दिलीप ने प्रयास किए, लेकिन अंततः दिलीप के पुत्र राजा भगीरथ की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा मैया स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुईं और सगर के पुत्रों का उद्धार हुआ। इसी महान रघुवंश की परंपरा में आगे चलकर अज के पुत्र महाराज दशरथ हुए, जिनका प्रताप ऐसा था कि वे देवताओं की ओर से युद्ध लड़ने स्वर्ग जाते थे। संतान सुख से वंचित महाराज दशरथ ने गुरु वशिष्ठ की आज्ञा से पुत्रेष्टि यज्ञ कराया, जिसके बाद अवध में चार पुत्रों (श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न) का जन्म हुआ।
कथा के दौरान राजा परीक्षित ने जब शुकदेव जी से पूछा कि श्रीकृष्ण जन्म से पहले श्रीराम की कथा क्यों सुनाई जाती है? तब गुरुदेव ने अद्भुत रहस्य बताते हुए कहा कि “भगवान श्रीकृष्ण चंचलता का स्वरूप हैं और भगवान श्रीराम धैर्य का स्वरूप हैं। जीवन में चंचलता को वही पचा सकता है जिसने पहले धैर्य को धारण किया हो। कृष्ण को वही समझ सकता है जिसने पहले राम को जाना हो।”
श्रीराम जन्म प्रसंग के तुरंत बाद कथा पंडाल में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव (नंदोत्सव) मनाया गया। कन्हैया के जन्मते ही पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर झूमने लगे। कथा विश्राम के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर मुख्य रूप से सुशील काजल, सचिन गोयल, सुनील सैनी, अनिल दत्ता और प्रेम जी सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।















