चंडीगढ़: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं और दुष्प्रचार को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ के प्रशासक और पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाबचंद कटारिया से मुलाकात की। पूर्व पार्षद एवं भाजपा नेता सतिंदर सिंह के नेतृत्व में सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र पांडेय, जयप्रकाश गुप्ता और राजीव पांडेय ने सेक्टर 9 स्थित सचिवालय में आयोजित राज्यपाल के ‘साप्ताहिक दरबार’ में यह गंभीर मुद्दा उठाया।
क्या है पूरा विवाद? (भ्रामक पुस्तक का दावा) प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को अवगत कराया कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप तेजी से वायरल की जा रही है।
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यह क्लिप पंजाब के एक टीवी चैनल के इंटरव्यू की है, जिसमें सुखदीप नामक व्यक्ति ने पंजाबी में दावा किया है कि आरएसएस ने वर्ष 1999 में एक किताब छापी थी, जिसमें सिख धर्म और गुरुओं के बारे में भ्रामक एवं आपत्तिजनक जानकारी दी गई थी।
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भाजपा नेता सतिंदर सिंह ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे एक ‘बेहद दुखदाई और गैर-जिम्मेदाराना हरकत’ बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हकीकत में आरएसएस द्वारा ऐसी कोई पुस्तक कभी लिखी या प्रकाशित ही नहीं की गई है।
पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) की घटना और साइबर सेल की निष्क्रियता प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
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सतिंदर सिंह ने बताया कि इस फर्जी वीडियो क्लिप के संबंध में कुछ दिन पहले ही चंडीगढ़ पुलिस के साइबर सेल को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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उन्होंने दावा किया कि यदि पुलिस ने समय रहते इस भ्रामक वीडियो पर रोक लगाई होती, तो पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) में आरएसएस के विरोध में नारेबाजी जैसी घटना नहीं होती।
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इसके अलावा, प्रतिनिधिमंडल ने याद दिलाया कि गत वर्ष कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा माता सीता और भगवान श्री राम के बारे में की गई अपमानजनक टिप्पणियों की शिकायत भी साइबर थाना (सेक्टर 17) में दी गई थी, जिस पर आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
‘विदेशी ताकतों की साजिश और समाज को बांटने का प्रयास’ बचपन से ही आरएसएस से जुड़े प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने चिंता व्यक्त की कि ऐसे भ्रामक दुष्प्रचार से लोग भ्रमित होकर संघ के स्वयंसेवकों के साथ दुर्व्यवहार कर सकते हैं। उन्होंने इसे पंजाब एवं अन्य क्षेत्रों में आपसी भाईचारा खराब करने और द्वेष फैलाने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया। उनका मानना है कि कुछ विदेशी ताकतें हमारे ही लोगों की धार्मिक भावनाएं भड़काकर समाज को विभाजित करना चाहती हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स और वक्ताओं के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
राज्यपाल कटारिया का कड़ा रुख और डीजीपी को निर्देश मामले की गंभीरता को समझते हुए राज्यपाल एवं प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने इस पर तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने बैठक के दौरान ही चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) से बात की और इस पूरे मामले—विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों को उकसाने वाले अराजक तत्वों—पर तुरंत और सख्त कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए।














